भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम को लेकर एक अत्यंत गंभीर और आपातकालीन चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से उठा शक्तिशाली चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के घातक मेल के कारण अगले 24 से 72 घंटों के भीतर देश के बड़े हिस्से में कुदरत का कहर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने कुल 21 राज्यों में भारी बारिश, बर्फीले तूफान और ओलावृष्टि की संभावना जताते हुए ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में शीतलहर
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में भारी हिमपात (Snowfall) का सिलसिला शुरू हो चुका है। IMD के अनुसार, इन क्षेत्रों में बर्फीली हवाओं की गति 50 से 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तराखंड के कई जिलों में मूसलाधार बारिश के साथ भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी गई है। पहाड़ों पर हो रही इस बर्फबारी का सीधा असर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में एक बार फिर कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है।
दिल्ली-एनसीआर और यूपी-बिहार में बारिश का अनुमान
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के आसमान में काले बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की प्रबल आशंका जताई है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा (Dense Fog) छाया रहेगा, जिससे विजिबिलिटी कम हो सकती है और रेल व सड़क यातायात बाधित होने की संभावना है। आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।
चक्रवात ‘मोंथा’ का दक्षिणी राज्यों पर असर
बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव अब एक प्रचंड चक्रवात ‘मोंथा’ में तब्दील हो चुका है। इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिल रहा है। प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी है। तमिलनाडु के प्रभावित जिलों में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में भेजा जा रहा है।
किसानों के लिए कृषि विभाग की महत्वपूर्ण सलाह
यह बेमौसम बारिश और चक्रवाती तूफान रबी फसलों के लिए बड़ा खतरा बनकर आया है। गेहूं, सरसों और चने की फसलें इस समय पकने की स्थिति में हैं, ऐसे में तेज हवाओं और ओलों से भारी नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- सिंचाई रोकें: अगले 72 घंटों तक फसलों में सिंचाई न करें।
- कीटनाशक का प्रयोग टालें: बारिश के दौरान किसी भी रासायनिक छिड़काव का असर नहीं होगा, अतः खर्च बचाएं।
- निकासी की व्यवस्था: खेतों में जलभराव न होने दें, पानी निकलने का उचित रास्ता बनाएं।
- फसल सुरक्षा: यदि कटी हुई फसल खेत में पड़ी है, तो उसे तिरपाल से ढंककर सुरक्षित स्थान पर रखें।
निष्कर्ष
चक्रवात ‘मोंथा’ और पश्चिमी विक्षोभ का यह दोहरा प्रहार अगले तीन से चार दिनों तक सक्रिय रह सकता है। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों और कच्चे ढांचों से दूर रहें। मौसम विभाग के ताजा अपडेट्स के लिए स्थानीय रेडियो, टीवी और आधिकारिक वेबसाइटों पर नजर बनाए रखें।